नई दिल्ली: एक शाम बाबा रामदेव के नाम भजन संध्या का आयोजन श्री बाबा रामदेव सेवा संघ, विश्वास नगर, शाहदरा दिल्ली द्वारा 20 सितम्बर को माता चिन्तापूर्णी मन्दिर में आयोजन रखा गया जिसमें म्यूजिकल पार्टी की सुमधुर धुन..............., ताल से सुर मिलाते गायक................, संगीत पर नृत्य करते कलाकार व भक्तजन.........., हाल में गुंजती तालियो कि गडगडाहट ........... साथ में गणमान्य नागरिकों का सान्निध्य में देर रात तक चली सांस्कृतिक संत महात्माओं व संध्या में कलाकारों ने बाबा रामदेव के एक से बढकर एक भजनों कि प्रस्तुतियां देकर दशका (भक्तों) को दांतों तले अंगुली दबाने पर विवश कर दिया गायक ने मधुर आवाज के गणेश वंदना का वंदन से आगाज हुआ इसमें बाद तो बाबा रामदेव के भजनो का एक से बढकर भजनो से दर्जन मन्दिर पांडाल के झुमने लगे और भजन संध्या से खचाखच भरे हाल में लोगों ने भजनो का जमकर लाभ उठाया इस मौको पर श्री बाबा रामदेव सेवा संघ की ओर से सभी कोम के लिये भोजन प्रसादी का आयोजन भी रखा गया था इस अवसर पर विशेष अतिथि श्री नारायणगीरीजी महन्त (श्री दुधेश्वर महादेव मन्दिर, गाजियाबाद, उ.प्र.), श्री दिनेश चैधरी, स्थानीय विधायक श्री नसीबसिंह चैधरी, श्री रतन पवार, निगम पार्षद विश्वास नगर, श्री ओमप्रकाश शर्मा, श्री महेन्द्र आहुजा, निगम पार्षद आनन्द विहार, श्री रतन चैधरी (आँजणा परिवार सम्पादक) साथ ही सेवा संघ के कार्यकर्ता श्री दीपाराम चैधरी (चैधरी आँजणा पटेल समाज, दिल्ली प्रदेश, उपाध्यक्ष) श्री दिनेशजी राजपुरोहित समाज सचिव दिल्ली प्रदेश) श्री जगदीश चैधरी, श्री श्रवणभाई चैधरी, श्री केसाराम चैधरी, श्री गोविन्द सिंह राजपुरोहित, श्री प्रकाशजी राजपुरोहित (मोनीटर गुड) श्री जबरारामजी माली, श्री छत्तरसिंहजी ठाकुर साहब एवं समस्त बाबा रामदेव सेवा संघ सदस्य विश्वास नगर मौजूद रहे।
जीवन-परिचय महंत श्री श्री १००८ संत शिरोमणि श्री किशनाराम जी महाराज शिकारपुरा (लूनी) पीठाधीश महंत श्री किशनाराम जी महाराज का ननिहाल रोहिचा (कल्ला) में भाखररामजी कुरड के यंहा माता श्रीमती चुन्नीबाई की कोख से दिनांक 20 अक्टूम्बर, १९३० को जन्म हुआ | किशनारामजी के पिताजी का नाम वजारामजी ओड सुपुत्र श्री विरमारामजी हैं जो (लूनी) के रहने वाले हैं | सात वर्ष की अवस्था में किशानारामजी के स्वास्थ्य में दिनोदिन गिरावट आती गयी, इस कारण वजारामजी किशनारामजी को शिकारपुरा आश्रम लेकर जाते और समाधी की परिक्रमा देकर वापस घर लोट आते, इसी बिच वजारामजी की भेंट महंत श्री देवारामजी महाराज के साथ हुयी, जिन्होंने किशनारामजी को अपने सानिध्य में रखने की इच्छा जाहिर की, तब वजारामजी ने अपने परिवार वालो से सलाह-मशविरा करके देवारामजी महाराज के सानिध्य में शिकारपुरा आश्रम को सुदुर्प कर दिया| फिर देवारामजी महाराज के सानिध्य में किशनारामजी की प्राथमिक शिक्षा आरम्भ हुयी तथा साथ ही धर्म और समाज सम्बन्धी जानका...
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